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ramayan 6.95.10: आज मैं अपने धनुष से छोड़े हुए उन तीखे बाणों द्वारा, जो प्रलयकाल के सूर्य के समान तेजस्वी हैं, राम और लक्ष्मण दोनों को यमलोक भेज दूँगा॥ 10॥   |   ramayan सर्ग 6.95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.95.10 
अद्य बाणैर्धनुर्मुक्तैर्युगान्तादित्यसंनिभै:।
राघवं लक्ष्मणं चैव नेष्यामि यमसादनम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
आज मैं अपने धनुष से छोड़े हुए उन तीखे बाणों द्वारा, जो प्रलयकाल के सूर्य के समान तेजस्वी हैं, राम और लक्ष्मण दोनों को यमलोक भेज दूँगा॥ 10॥
 
Today, with the sharp arrows shot from my bow, which are as radiant as the Sun at the time of doomsday, I shall send both Rama and Lakshmana to Yamaloka.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)