श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 94: राक्षसियों का विलाप  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.94.8 
कथं सर्वगुणैर्हीना गुणवन्तं महौजसम्।
सुमुखं दुर्मुखी रामं कामयामास राक्षसी॥ ८॥
 
 
अनुवाद
कहाँ तो सर्वगुणसम्पन्न, अत्यन्त बलवान और सुन्दर मुख वाले श्री रामजी हैं और कहाँ वह सब गुणों से हीन दुष्टबुद्धि राक्षस! उसने उनकी किस प्रकार कामना की? 8॥
 
Where is Shri Ram, who is blessed with all the qualities, is very powerful and has a beautiful face, and where is that evil-minded demon who is inferior in all qualities! How did he wish for them? 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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