श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 94: राक्षसियों का विलाप  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.94.41 
इतीव सर्वा रजनीचरस्त्रिय:
परस्परं सम्परिरभ्य बाहुभि:।
विषेदुरार्तातिभयाभिपीडिता
विनेदुरुच्चैश्च तदा सुदारुणम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सब रात्रिचर स्त्रियाँ एक दूसरे को बांहों में भरकर व्याकुल होकर रोने लगीं और अत्यन्त भय से पीड़ित होकर भयंकर रूप से रोने लगीं ॥41॥
 
Thus all the women of the night creatures, embracing one another in their arms, became weeping in anguish and gloom, and being afflicted with great fear, began to cry horribly. ॥ 41॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे चतुर्नवतितम: सर्ग: ॥ ९ ४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें चौरानबेवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ९ ४॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)