श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 94: राक्षसियों का विलाप  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.94.37 
रावणस्यापनीतेन दुर्विनीतस्य दुर्मते:।
अयं निष्टानको घोर: शोकेन समभिप्लुत:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
अभिमानी और दुष्टबुद्धि वाले रावण के अन्याय के कारण हम सब लोगों को शोक से मिश्रित यह भयंकर विनाश सहना पड़ा है ॥37॥
 
Due to the injustice of the arrogant and evil-minded Ravana, we have all suffered this terrible destruction mixed with grief. ॥ 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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