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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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श्लोक 33
श्लोक
6.94.33
अद्यप्रभृति लोकांस्त्रीन् सर्वे दानवराक्षसा:।
भयेन प्रभृता नित्यं विचरिष्यन्ति शाश्वतम्॥ ३३॥
अनुवाद
आज से समस्त दैत्य और राक्षस भय से भरकर ही तीनों लोकों में निरन्तर विचरण करेंगे॥33॥
From today onwards all the demons and rakshasas will roam in the three worlds continuously only after being filled with fear'. 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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