vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 94: राक्षसियों का विलाप
»
श्लोक 31
श्लोक
6.94.31
पीड्यमानास्तु बलिना वरदानेन रक्षसा।
दीप्तैस्तपोभिर्विबुधा: पितामहमपूजयन्॥ ३१॥
अनुवाद
जब महाबली राक्षस रावण ने अपनी घोर तपस्या और वरदान के प्रभाव से देवताओं को कष्ट पहुँचाया, तब उन्होंने पितामह ब्रह्माजी की आराधना की ॥31॥
When the mighty demon Ravana tormented the gods with his intense penance and the influence of his boon, they worshiped Grandfather Brahmaji. 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×