श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 94: राक्षसियों का विलाप  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.94.27 
तं न देवा न गन्धर्वा न पिशाचा न राक्षसा:।
उपसृष्टं परित्रातुं शक्ता रामेण संयुगे॥ २७॥
 
 
अनुवाद
श्री राम युद्धभूमि में जिसे मारने के लिए उद्यत हैं, उसे न देवता, न गन्धर्व, न पिशाच, न राक्षस ही बचा सकते हैं॥27॥
 
Whoever Shri Ram is determined to kill in the battlefield, neither gods, nor Gandharvas, nor vampires, nor demons can save him. 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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