श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 94: राक्षसियों का विलाप  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.94.18 
ऋष्यमूके वसंश्चैव दीनो भग्नमनोरथ:।
सुग्रीव: प्रापितो राज्यं पर्याप्तं तन्निदर्शनम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव ऋष्यमूक पर्वत पर बड़े दुःख और निराशा में रह रहे थे; परन्तु श्रीराम ने उन्हें किष्किन्धा के सिंहासन पर बिठाया। उनके प्रभाव को समझने के लिए केवल यही एक उदाहरण पर्याप्त है॥18॥
 
Sugreeva was living on the Rishyamuk mountain in great sorrow and despair; but Shri Ram made him sit on the throne of Kishkinda. That one example alone is enough to understand his influence.॥ 18॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas