श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 94: राक्षसियों का विलाप  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.94.12 
न च सीतां दशग्रीव: प्राप्नोति जनकात्मजाम्।
बद्धं बलवता वैरमक्षयं राघवेण च॥ १२॥
 
 
अनुवाद
दस सिर वाला रावण जनकनन्दिनी सीता को कभी नहीं पा सकेगा; परन्तु उसने महाबली रघुनाथजी के साथ अमिट शत्रुता कर ली है॥12॥
 
‘The ten-headed Ravan will never be able to get Janakanandini Sita; but he has formed an indelible enmity with the mighty Raghunathji.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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