अब्रवीच्च तदा राम: सुग्रीवं प्रत्यनन्तरम्।
विभीषणं च धर्मात्मा हनूमन्तं च वानरम्॥ ३७॥
जाम्बवन्तं हरिश्रेष्ठं मैन्दं द्विविदमेव च।
एतदस्त्रबलं दिव्यं मम वा त्र्यम्बकस्य वा॥ ३८॥
अनुवाद
उस समय धर्मात्मा श्रीराम ने अपने समीप खड़े सुग्रीव, विभीषण, कपिवर हनुमान, जाम्बवान, कपिश्रेष्ठ मुख्य तथा द्विविद से कहा- 'यह दिव्य अस्त्र शक्ति मुझमें है अथवा भगवान शंकर में है।' 37-38॥
At that time, the virtuous Shri Ram said to Sugriva, Vibhishan, Kapivar Hanuman, Jambavan, Kapishrestha Main and Dwivid standing near him - 'Is this divine weapon power in me or in Lord Shankar'. 37-38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥