श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 93: श्रीराम द्वारा राक्षस सेना का संहार  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.93.22 
छिन्नं भिन्नं शरैर्दग्धं प्रभग्नं शस्त्रपीडितम्।
बलं रामेण ददृशुर्न रामं शीघ्रकारिणम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उसने अपनी सेना को श्री रामजी के बाणों से छिन्न-भिन्न, जलती, टूटी और पीड़ित होते देखा; परंतु वेगपूर्वक युद्ध करने वाले श्री रामजी उसकी दृष्टि में नहीं थे॥22॥
 
He saw his army being torn apart, burnt, broken and afflicted by the arrows of Shri Rama; but Shri Rama, who fought swiftly, was not in his sight. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)