श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 93: श्रीराम द्वारा राक्षस सेना का संहार  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.93.14 
केशान् कर्णललाटं च नासिकाश्च प्लवंगमा:।
रक्षसां दशनैस्तीक्ष्णैर्नखैश्चापि व्यकर्तयन्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
बंदर अपने तीखे दांतों और नाखूनों से रात्रिचर जीवों के बाल, कान, माथा और नाक कुतरते थे। 14.
 
The monkeys used to nibble on the hair, ears, forehead and nose of the night creatures with their sharp teeth and nails. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)