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ramayan 6.92.7-8h: बेटा! जब तुम क्रोधित होते थे, तब तो तुम अपने बाणों से काल और अंतक को भी बींध सकते थे, मंदराचल की चोटियों को भी तोड़ सकते थे; फिर युद्ध में लक्ष्मण को मारना तुम्हारे लिए कौन सी बड़ी बात थी?॥7 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  6.92.7-8h 
ननु त्वमिषुभि: क्रुद्धो भिन्द्या: कालान्तकावपि॥ ७॥
मन्दरस्यापि शृङ्गाणि किं पुनर्लक्ष्मणं युधि।
 
 
अनुवाद
बेटा! जब तुम क्रोधित होते थे, तब तो तुम अपने बाणों से काल और अंतक को भी बींध सकते थे, मंदराचल की चोटियों को भी तोड़ सकते थे; फिर युद्ध में लक्ष्मण को मारना तुम्हारे लिए कौन सी बड़ी बात थी?॥7 1/2॥
 
Son! When you were angry, you could pierce even Kaal and Antaka with your arrows, you could even break the peaks of Mandaraachal; then what was the big deal for you in killing Lakshman in the war?॥ 7 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)