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कथं नाम दशग्रीव साक्षाद्वैश्रवणानुज।
हन्तुमिच्छसि वैदेहीं क्रोधाद् धर्ममपास्य च॥ ६३॥
अनुवाद
महाराज दशग्रीव! आप तो स्वयं कुबेर के भाई हैं; फिर आप क्रोधवश धर्म को त्यागकर विदेहकुमारी को मारने की इच्छा क्यों कर रहे हैं?॥ 63॥
‘Maharaja Dashagriva! You are the brother of Kubera himself; then how come you, out of anger, have given up on Dharma and are wishing to kill Videha Kumari?॥ 63॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥