Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.92.56-57h: 'मेरी सास कौशल्या केवल एक पुत्र की माता हैं। यदि वे युद्ध में अपने पुत्र के विनाश का समाचार सुनेंगी, तो मुझे लगता है कि उनका हृदय अवश्य ही फट जाएगा।'   |   ramayan सर्ग 6.92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  6.92.56-57h 
मन्ये तु हृदयं तस्या: कौसल्याया: फलिष्यति॥ ५६॥
एकपुत्रा यदा पुत्रं विनष्टं श्रोष्यते युधि।
 
 
अनुवाद
'मेरी सास कौशल्या केवल एक पुत्र की माता हैं। यदि वे युद्ध में अपने पुत्र के विनाश का समाचार सुनेंगी, तो मुझे लगता है कि उनका हृदय अवश्य ही फट जाएगा।'
 
‘My mother-in-law Kausalya is the mother of only one son. If she hears the news of her son's destruction in the war, I think her heart will surely burst. 56 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)