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उपलभ्य चिरात् संज्ञां राजा राक्षसपुंगव:॥ ५॥
पुत्रशोकाकुलो दीनो विललापाकुलेन्द्रिय:।
अनुवाद
बहुत समय बाद जब रावण को होश आया तो वह पुत्र के वियोग में शोक से व्याकुल हो उठा। उसकी सारी इन्द्रियाँ व्याकुल हो गईं और वह करुण स्वर में विलाप करने लगा।
Then after a long time, regaining consciousness, the great demon king Ravana became distraught with grief for the loss of his son. All his senses became restless and he started wailing pitifully.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥