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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना  »  श्लोक 49-50h
 
 
श्लोक  6.92.49-50h 
बहुशश्चोदयामास भर्तारं मामनुव्रताम्॥ ४९॥
भार्या मम भवस्वेति प्रत्याख्यातो ध्रुवं मया।
 
 
अनुवाद
यद्यपि मैं अपने पति से प्रेम करती हूँ, फिर भी उन्होंने कई बार मुझसे अपनी पत्नी बनने का आग्रह किया।’ उस समय मैंने उन्हें निश्चित रूप से मना कर दिया था।
 
Even though I love my husband, he urged me many times to become his wife.' At that time, I had certainly refused him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)