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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना  »  श्लोक 46-47
 
 
श्लोक  6.92.46-47 
मैथिली रक्ष्यमाणा तु राक्षसीभिरनिन्दिता।
ददर्श राक्षसं क्रुद्धं निस्त्रिंशवरधारिणम्॥ ४६॥
तं निशम्य सनिस्त्रिंशं व्यथिता जनकात्मजा।
निवार्यमाणं बहुश: सुहृद्भिरनिवर्तिनम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
उस समय सती-साध्वी सीता राक्षसियों के संरक्षण में थीं। उन्होंने देखा कि क्रोध में भरा हुआ एक राक्षस एक बहुत बड़ी तलवार लेकर उन्हें मारने के लिए आ रहा है। यद्यपि उसके मित्र उसे बार-बार रोक रहे थे, फिर भी वह पीछे नहीं हट रहा था। रावण को इस प्रकार तलवार लेकर आते देख जनकनंदिनी को बहुत दुःख हुआ। 46-47
 
At that time, Sati-sadhvi Sita was under the protection of demonesses. She saw that a demon filled with anger was coming with a very big sword to kill her. Although his friends were stopping him repeatedly, he was not turning back. Seeing Ravana coming with a sword like this, Janakanandini felt very sad. 46-47.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)