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ramayan 6.92.43: रावण तीनों लोकों की समस्त बहुमूल्य सामग्रियों का उपभोग कर रहा है। पृथ्वी पर उसके समान पराक्रमी और बलवान कोई दूसरा नहीं है॥ 43॥   |   ramayan सर्ग 6.92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.92.43 
त्रिषु लोकेषु रत्नानि भुङ्‍क्ते आहृत्य रावण:।
विक्रमे च बले चैव नास्त्यस्य सदृशो भुवि॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
रावण तीनों लोकों की समस्त बहुमूल्य सामग्रियों का उपभोग कर रहा है। पृथ्वी पर उसके समान पराक्रमी और बलवान कोई दूसरा नहीं है॥ 43॥
 
Ravana is enjoying all the precious materials from the three worlds. There is no one else on earth as valiant and powerful as him.'॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)