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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.92.37 
तदिदं तथ्यमेवाहं करिष्ये प्रियमात्मन:।
वैदेहीं नाशयिष्यामि क्षत्रबन्धुमनुव्रताम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
अतः आज मैं उस झूठ को सत्य सिद्ध कर दूँगा और ऐसा करके मैं तुम्हें अपना प्रिय बना लूँगा। मैं उस क्षत्रिय-धर्मी राम से प्रेम करने वाली सीता का विनाश कर दूँगा।'
 
So today I will prove that lie to be true and by doing so I will make you my favourite. I will destroy Sita who loves that Kshatriya-dharma Ram.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)