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ramayan 6.92.30: मेरे पास ब्रह्माजी का दिया हुआ एक कवच है, जो सूर्य के समान चमकता है। देवताओं और दानवों के साथ युद्ध करते समय वह वज्र के प्रहार से भी नहीं टूटा है।॥30॥   |   ramayan सर्ग 6.92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.92.30 
कवचं ब्रह्मदत्तं मे यदादित्यसमप्रभम्।
देवासुरविमर्देषु न च्छिन्नं वज्रमुष्टिभि:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
मेरे पास ब्रह्माजी का दिया हुआ एक कवच है, जो सूर्य के समान चमकता है। देवताओं और दानवों के साथ युद्ध करते समय वह वज्र के प्रहार से भी नहीं टूटा है।॥30॥
 
I have an armour given to me by Lord Brahma, which shines like the Sun. During my battles with the Gods and the demons, it has not been broken even by the blows of thunderbolts. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)