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ramayan 6.92.26: सभी दिशाओं में क्रोध से भरे हुए मृत्यु के समान दृष्टि रखने वाले तथा सभी जीवित और निर्जीव प्राणियों को खाने की इच्छा रखने वाले राक्षस रावण के पास जाने का साहस नहीं करते थे।   |   ramayan सर्ग 6.92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.92.26 
तमन्तकमिव क्रुद्धं चराचरचिखादिषुम्।
वीक्षमाणं दिश: सर्वा राक्षसा नोपचक्रमु:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
सभी दिशाओं में क्रोध से भरे हुए मृत्यु के समान दृष्टि रखने वाले तथा सभी जीवित और निर्जीव प्राणियों को खाने की इच्छा रखने वाले राक्षस रावण के पास जाने का साहस नहीं करते थे।
 
Looking in all directions like the enraged Death, who desired to devour all living and non-living creatures, the demons would not go near Ravana - they did not dare to go near him. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)