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ramayan 6.92.25: काली अग्नि के समान प्रचण्ड होकर जिस ओर भी वे देखते, उस ओर खड़े हुए राक्षस भयभीत होकर खम्भों आदि के पीछे छिप जाते॥ 25॥   |   ramayan सर्ग 6.92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.92.25 
कालाग्निरिव संक्रुद्धो यां यां दिशमवैक्षत।
तस्यां तस्यां भयत्रस्ता राक्षसा: संविलिल्यिरे॥ २५॥
 
 
अनुवाद
काली अग्नि के समान प्रचण्ड होकर जिस ओर भी वे देखते, उस ओर खड़े हुए राक्षस भयभीत होकर खम्भों आदि के पीछे छिप जाते॥ 25॥
 
Being as furious as the black fire, whichever direction he looked towards, the demons standing in that direction became frightened and hid themselves behind pillars etc.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)