Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.92.21: रावण की आँखें स्वभावतः ही लाल थीं। दूसरे, क्रोध की अग्नि ने उन्हें और भी अधिक रक्त-लाल बना दिया था। इसलिए उसकी चमकती हुई आँखें अत्यंत भयंकर प्रतीत हो रही थीं ॥ 21॥ | ramayan सर्ग 6.92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रावण की आँखें स्वभावतः ही लाल थीं। दूसरे, क्रोध की अग्नि ने उन्हें और भी अधिक रक्त-लाल बना दिया था। इसलिए उसकी चमकती हुई आँखें अत्यंत भयंकर प्रतीत हो रही थीं ॥ 21॥
Ravan's eyes were naturally red. Secondly, the fire of anger had made them even more blood red. Hence, his glowing eyes appeared extremely fierce. ॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥