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ramayan 6.92.18: माथे पर वक्र भौंहें लिए हुए वह ऐसे शोभायमान हो रहा था जैसे प्रलयकाल में मगरमच्छों और विशाल लहरों से समुद्र सुशोभित हो जाता है॥18॥   |   ramayan सर्ग 6.92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.92.18 
ललाटे भ्रुकुटीभिश्च संगताभिर्व्यरोचत।
युगान्ते सह नक्रैस्तु महोर्मिभिरिवोदधि:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
माथे पर वक्र भौंहें लिए हुए वह ऐसे शोभायमान हो रहा था जैसे प्रलयकाल में मगरमच्छों और विशाल लहरों से समुद्र सुशोभित हो जाता है॥18॥
 
With his curved eyebrows on his forehead, he looked as beautiful as the ocean is beautified by crocodiles and huge waves during the time of deluge.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)