Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.92.17: एक तो वह स्वभाव से ही गुस्सैल स्वभाव के थे। दूसरे, बेटे की चिंता उन्हें और भी बेचैन कर देती थी - उन्हें और भी बेचैन कर देती थी, ठीक वैसे ही जैसे गर्मी के मौसम में सूरज की किरणें उन्हें और भी उग्र बना देती हैं। | ramayan सर्ग 6.92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एक तो वह स्वभाव से ही गुस्सैल स्वभाव के थे। दूसरे, बेटे की चिंता उन्हें और भी बेचैन कर देती थी - उन्हें और भी बेचैन कर देती थी, ठीक वैसे ही जैसे गर्मी के मौसम में सूरज की किरणें उन्हें और भी उग्र बना देती हैं।
Firstly, he was short-tempered by nature. Secondly, the worries for his son made him more agitated – made him more agitated, just as the rays of the sun make him more fierce in the summer season.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥