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ramayan 6.92.16: इस प्रकार विलाप करते हुए राक्षसराज रावण अपने पुत्र के वध का स्मरण करके अत्यन्त क्रोध से भर गया।   |   ramayan सर्ग 6.92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.92.16 
एवमादिविलापार्तं रावणं राक्षसाधिपम्।
आविवेश महान् कोप: पुत्रव्यसनसम्भव:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार विलाप करते हुए राक्षसराज रावण अपने पुत्र के वध का स्मरण करके अत्यन्त क्रोध से भर गया।
 
While lamenting in this manner, the king of demons Ravana was filled with great anger on remembering the killing of his son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)