Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.92.14: वीर! होना तो यह चाहिए था कि मैं पहले यमलोक जाता और तुम यहीं रहकर अपना प्रेत-कर्म करते; परन्तु तुम तो विपरीत गति को प्राप्त हो गए (तुम परलोक चले गए और मुझे तुम्हारा प्रेत-कर्म करना पड़ेगा)॥14॥ | ramayan सर्ग 6.92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मम नाम त्वया वीर गतस्य यमसादनम्।
प्रेतकार्याणि कार्याणि विपरीते हि वर्तसे॥ १४॥
अनुवाद
वीर! होना तो यह चाहिए था कि मैं पहले यमलोक जाता और तुम यहीं रहकर अपना प्रेत-कर्म करते; परन्तु तुम तो विपरीत गति को प्राप्त हो गए (तुम परलोक चले गए और मुझे तुम्हारा प्रेत-कर्म करना पड़ेगा)॥14॥
‘Veer! What should have happened was that I would have gone to Yamaloka first and you would have stayed here and performed my ghostly duties; but you got into the opposite state (you went to the other world and I will have to perform your ghostly duties).॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥