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ramayan 6.92.13: हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले पुत्र! आज तुम अपना युवराजपद, लंकापुरी, समस्त राक्षस, अपनी माता, मुझे और अपनी स्त्रियों - हम सबको छोड़कर कहाँ चले गए?॥13॥   |   ramayan सर्ग 6.92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.92.13 
यौवराज्यं च लङ्कां च रक्षांसि च परंतप।
मातरं मां च भार्याश्च क्व गतोऽसि विहाय न:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले पुत्र! आज तुम अपना युवराजपद, लंकापुरी, समस्त राक्षस, अपनी माता, मुझे और अपनी स्त्रियों - हम सबको छोड़कर कहाँ चले गए?॥13॥
 
O son who torments the enemies! Where have you gone today, leaving behind your crown prince status, Lankapuri, all the demons, your mother, me and your wives - all of us?॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)