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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 91: लक्ष्मण और विभीषण आदि का श्रीरामचन्द्रजी के पास आकर इन्द्रजित के वध का समाचार सुनाना, प्रसन्न हुए श्रीराम के द्वारा लक्ष्मण को हृदय से लगाकर उनकी प्रशंसा तथा सुषेण द्वारा लक्ष्मण आदि की चिकित्सा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.91.5 
निष्टनन्निव चागत्य राघवाय महात्मने।
आचचक्षे तदा वीरो घोरमिन्द्रजितो वधम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उस समय वीर विभीषण शत्रु के मारे जाने का समाचार सुनाकर प्रसन्नतापूर्वक लौट आए और महात्मा श्री रघुनाथजी से बोले - 'प्रभो! इंद्रजित् को मारने का भयंकर कार्य पूर्ण हो गया है॥5॥
 
At that time brave Vibhishan came back happily informing about the death of the enemy and said to Mahatma Shri Raghunathji - 'Lord! The terrible task of killing Indrajit has been completed. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)