श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 91: लक्ष्मण और विभीषण आदि का श्रीरामचन्द्रजी के पास आकर इन्द्रजित के वध का समाचार सुनाना, प्रसन्न हुए श्रीराम के द्वारा लक्ष्मण को हृदय से लगाकर उनकी प्रशंसा तथा सुषेण द्वारा लक्ष्मण आदि की चिकित्सा  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.91.25 
स तस्य गन्धमाघ्राय विशल्य: समपद्यत।
तदा निर्वेदनश्चैव संरूढव्रण एव च॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उसकी सुगंध पाते ही लक्ष्मण के शरीर से बाण निकल गए और उनकी सारी पीड़ा मिट गई। उनके शरीर के सारे घाव भर गए॥ 25॥
 
As soon as Lakshmana smelled its fragrance, the arrows came out of his body and all his pain vanished. All the wounds on his body healed.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)