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ramayan 6.91.18: मैं अपने पुत्र की मृत्यु के कारण क्रोध में आये हुए अजेय राक्षसराज रावण को अपनी विशाल सेना की सहायता से घेरकर उसका वध कर दूँगा।   |   ramayan सर्ग 6.91: लक्ष्मण और विभीषण आदि का श्रीरामचन्द्रजी के पास आकर इन्द्रजित के वध का समाचार सुनाना, प्रसन्न हुए श्रीराम के द्वारा लक्ष्मण को हृदय से लगाकर उनकी प्रशंसा तथा सुषेण द्वारा लक्ष्मण आदि की चिकित्सा   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 91: लक्ष्मण और विभीषण आदि का श्रीरामचन्द्रजी के पास आकर इन्द्रजित के वध का समाचार सुनाना, प्रसन्न हुए श्रीराम के द्वारा लक्ष्मण को हृदय से लगाकर उनकी प्रशंसा तथा सुषेण द्वारा लक्ष्मण आदि की चिकित्सा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.91.18 
तं पुत्रवधसंतप्तं निर्यान्तं राक्षसाधिपम्।
बलेनावृत्य महता निहनिष्यामि दुर्जयम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
मैं अपने पुत्र की मृत्यु के कारण क्रोध में आये हुए अजेय राक्षसराज रावण को अपनी विशाल सेना की सहायता से घेरकर उसका वध कर दूँगा।
 
I will surround the invincible demon king Ravana, who has come out in anger due to the death of his son, with the help of my huge army and kill him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)