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ramayan 6.91.11-12: शरीर में लगे बाणों के कारण लक्ष्मण को बड़ी पीड़ा हो रही थी। उनके अंगों पर अनेक स्थानों पर घाव हो गए थे। वे बार-बार गहरी साँसें ले रहे थे, बाणों के प्रहार से उत्पन्न पीड़ा से वे पीड़ित हो रहे थे और साँस लेने में भी उन्हें पीड़ा हो रही थी। उस अवस्था में भगवान श्री राम ने स्नेहपूर्वक उनके माथे को सूंघा और उनकी पीड़ा दूर करने के लिए पुनः शीघ्रता से उनके शरीर पर हाथ फेरा और लक्ष्मण से इस प्रकार बोले -॥11-12॥   |   ramayan सर्ग 6.91: लक्ष्मण और विभीषण आदि का श्रीरामचन्द्रजी के पास आकर इन्द्रजित के वध का समाचार सुनाना, प्रसन्न हुए श्रीराम के द्वारा लक्ष्मण को हृदय से लगाकर उनकी प्रशंसा तथा सुषेण द्वारा लक्ष्मण आदि की चिकित्सा   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 91: लक्ष्मण और विभीषण आदि का श्रीरामचन्द्रजी के पास आकर इन्द्रजित के वध का समाचार सुनाना, प्रसन्न हुए श्रीराम के द्वारा लक्ष्मण को हृदय से लगाकर उनकी प्रशंसा तथा सुषेण द्वारा लक्ष्मण आदि की चिकित्सा  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  6.91.11-12 
शल्यसम्पीडितं शस्तं नि:श्वसन्तं तु लक्ष्मणम्।
रामस्तु दु:खसंतप्तं तं तु नि:श्वासपीडितम्॥ ११॥
मूर्ध्नि चैनमुपाघ्राय भूय: संस्पृश्य च त्वरन्।
उवाच लक्ष्मणं वाक्यमाश्वास्य पुरुषर्षभ:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
शरीर में लगे बाणों के कारण लक्ष्मण को बड़ी पीड़ा हो रही थी। उनके अंगों पर अनेक स्थानों पर घाव हो गए थे। वे बार-बार गहरी साँसें ले रहे थे, बाणों के प्रहार से उत्पन्न पीड़ा से वे पीड़ित हो रहे थे और साँस लेने में भी उन्हें पीड़ा हो रही थी। उस अवस्था में भगवान श्री राम ने स्नेहपूर्वक उनके माथे को सूंघा और उनकी पीड़ा दूर करने के लिए पुनः शीघ्रता से उनके शरीर पर हाथ फेरा और लक्ष्मण से इस प्रकार बोले -॥11-12॥
 
Lakshmana was in great pain due to the arrows stuck in his body. There were wounds in many places on his limbs. He was repeatedly taking deep breaths, he was suffering from the pain caused by the blows and he was having pain even in breathing. In that condition, the Supreme Personality of Godhead Shri Ram smelled his forehead with affection and again hurriedly stroked his body to relieve his pain and said to Lakshmana as follows -॥ 11-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)