श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 9: विभीषण का रावण से श्रीराम की अजेयता बताकर सीता को लौटा देने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.9.9 
प्रमत्तेष्वभियुक्तेषु दैवेन प्रहतेषु च।
विक्रमास्तात सिद्धॺन्ति परीक्ष्य विधिना कृता:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! जो शत्रु असावधान हैं, जिन पर अन्य शत्रुओं ने आक्रमण किया है, तथा जो भयंकर रोग आदि से मर गए हैं, उनकी ही विधिपूर्वक किए गए पराक्रम से परीक्षा होती है॥9॥
 
Father! Only those enemies who are careless, who are attacked by other enemies and who have died due to serious illness etc., are successfully tested by the mighty acts performed as per the prescribed method.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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