श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 9: विभीषण का रावण से श्रीराम की अजेयता बताकर सीता को लौटा देने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.9.8 
अप्युपायैस्त्रिभिस्तात योऽर्थ: प्राप्तुं न शक्यते।
तस्य विक्रमकालांस्तान् युक्तानाहुर्मनीषिण:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘तत्! जो अभीष्ट कामना साम, दान और भेद इन तीन उपायों से सिद्ध नहीं होती, उसे प्राप्त करने के लिए नीतिज्ञ विद्वान् विद्वानों ने पराक्रम के योग्य अवसर सुझाए हैं। 8॥
 
‘Tat! To achieve the desired desire which cannot be achieved by these three means – Sama, Daan and Bheda, wise scholars knowledgeable in ethics have suggested opportunities worthy of bravery. 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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