vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 9: विभीषण का रावण से श्रीराम की अजेयता बताकर सीता को लौटा देने के लिये अनुरोध करना
»
श्लोक 18
श्लोक
6.9.18
यावत् सुघोरा महती दुर्धर्षा हरिवाहिनी।
नावस्कन्दति नो लङ्कां तावत् सीता प्रदीयताम्॥ १८॥
अनुवाद
‘जब तक ऐसी भयंकर, विशाल और अजेय वानरों की सेना हमारी लंका को रौंद न डाले, तब तक सीता को लौटा देना चाहिए ॥18॥
‘Until such a fearsome, large and invincible army of monkeys tramples our Lanka, Sita must be returned.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×