श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 9: विभीषण का रावण से श्रीराम की अजेयता बताकर सीता को लौटा देने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.9.18 
यावत् सुघोरा महती दुर्धर्षा हरिवाहिनी।
नावस्कन्दति नो लङ्कां तावत् सीता प्रदीयताम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
‘जब तक ऐसी भयंकर, विशाल और अजेय वानरों की सेना हमारी लंका को रौंद न डाले, तब तक सीता को लौटा देना चाहिए ॥18॥
 
‘Until such a fearsome, large and invincible army of monkeys tramples our Lanka, Sita must be returned.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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