श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 9: विभीषण का रावण से श्रीराम की अजेयता बताकर सीता को लौटा देने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.9.17 
यावन्न सगजां साश्वां बहुरत्नसमाकुलाम्।
पुरीं दारयते बाणैर्दीयतामस्य मैथिली॥ १७॥
 
 
अनुवाद
‘जब तक भगवान राम अपने बाणों से हाथी, घोड़े और रत्नों से भरी हुई लंकापुरी को नष्ट न कर दें, तब तक मैथिली उन्हें लौटा दी जाए।॥17॥
 
‘Until Lord Rama destroys Lankapuri, which is filled with elephants, horses and precious stones, with his arrows, Maithili should be returned to him.॥ 17॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd