श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 9: विभीषण का रावण से श्रीराम की अजेयता बताकर सीता को लौटा देने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.9.16 
न तु क्षमं वीर्यवता तेन धर्मानुवर्तिना।
वैरं निरर्थकं कर्तुं दीयतामस्य मैथिली॥ १६॥
 
 
अनुवाद
श्री राम बड़े ही धर्मात्मा और पराक्रमी पुरुष हैं। उनसे अनावश्यक शत्रुता करना उचित नहीं है। मिथिला की पुत्री सीता उन्हें लौटा देनी चाहिए॥16॥
 
Shri Ram is a very pious and valiant person. It is not right to have unnecessary enmity with him. Mithila's daughter Sita should be returned to him.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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