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ramayan 6.9.11-12: हे दैत्यों! इस संसार में कौन उन नदियों और जलधाराओं के स्वामी हनुमान जी की गति को जान या अनुमान कर सकता है, जो एक ही छलांग में भयंकर समुद्र को पार करके यहाँ पहुँच गए? शत्रुओं के पास असंख्य सेनाएँ होती हैं, उनमें अपार बल और पराक्रम होता है; यह तुम सब लोग भली-भाँति जानते हो। दूसरों के बल को भूलकर उनकी अचानक उपेक्षा नहीं करनी चाहिए॥ 11-12॥   |   ramayan सर्ग 6.9: विभीषण का रावण से श्रीराम की अजेयता बताकर सीता को लौटा देने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.9.11-12 
समुद्रं लङ्घयित्वा तु घोरं नदनदीपतिम्।
गतिं हनूमतो लोके को विद्यात् तर्कयेत वा॥ ११॥
बलान्यपरिमेयानि वीर्याणि च निशाचरा:।
परेषां सहसावज्ञा न कर्तव्या कथंचन॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे दैत्यों! इस संसार में कौन उन नदियों और जलधाराओं के स्वामी हनुमान जी की गति को जान या अनुमान कर सकता है, जो एक ही छलांग में भयंकर समुद्र को पार करके यहाँ पहुँच गए? शत्रुओं के पास असंख्य सेनाएँ होती हैं, उनमें अपार बल और पराक्रम होता है; यह तुम सब लोग भली-भाँति जानते हो। दूसरों के बल को भूलकर उनकी अचानक उपेक्षा नहीं करनी चाहिए॥ 11-12॥
 
O demons! Who in this world can know or estimate the speed of Hanuman ji, the lord of rivers and streams, who crossed the dreadful ocean in a single leap and reached here? The enemies have innumerable armies, they have immense power and valour; you all should know this well. One should not suddenly ignore others by forgetting their strength.॥ 11-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)