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ramayan 6.9.10: श्री रामचंद्रजी अनजान नहीं हैं। वे विजय की इच्छा से आ रहे हैं और उनके साथ सेना भी है। उन्होंने क्रोध पर पूर्ण विजय प्राप्त कर ली है। अतः वे सर्वथा अजेय हैं। ऐसे अजेय योद्धा को तुम लोग परास्त करना चाहते हो॥10॥   |   ramayan सर्ग 6.9: विभीषण का रावण से श्रीराम की अजेयता बताकर सीता को लौटा देने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 9: विभीषण का रावण से श्रीराम की अजेयता बताकर सीता को लौटा देने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.9.10 
अप्रमत्तं कथं तं तु विजिगीषुं बले स्थितम्।
जितरोषं दुराधर्षं तं धर्षयितुमिच्छथ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचंद्रजी अनजान नहीं हैं। वे विजय की इच्छा से आ रहे हैं और उनके साथ सेना भी है। उन्होंने क्रोध पर पूर्ण विजय प्राप्त कर ली है। अतः वे सर्वथा अजेय हैं। ऐसे अजेय योद्धा को तुम लोग परास्त करना चाहते हो॥10॥
 
‘Sri Ramachandraji is not unaware. He is coming with the desire of victory and has an army with him. He has completely conquered anger. Hence, he is completely invincible. You people want to defeat such an invincible warrior.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)