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ramayan 6.89.50: उन पर्वताकार वानरों के भार से कुचले जाने के कारण उन घोड़ों के मुख से रक्त बहने लगा।   |   ramayan सर्ग 6.89: विभीषण का राक्षसों पर प्रहार, उनका वानरयूथ पतियों को प्रोत्साहन देना, लक्ष्मण द्वारा इन्द्रजित के सारथि का और वानरों द्वारा उसके घोड़ों का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 89: विभीषण का राक्षसों पर प्रहार, उनका वानरयूथ पतियों को प्रोत्साहन देना, लक्ष्मण द्वारा इन्द्रजित के सारथि का और वानरों द्वारा उसके घोड़ों का वध  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  6.89.50 
तेषामधिष्ठितानां तैर्वानरै: पर्वतोपमै:।
मुखेभ्यो रुधिरं व्यक्तं हयानां समवर्तत॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
उन पर्वताकार वानरों के भार से कुचले जाने के कारण उन घोड़ों के मुख से रक्त बहने लगा।
 
Being crushed under the weight of those mountain-like monkeys, blood began to flow from the mouths of those horses. 50.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)