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ramayan 6.89.4: जैसे वज्र नामक अस्त्र विशाल पर्वतों को भेद देता है, उसी प्रकार विभीषण के छोड़े हुए बाण, जिनका स्पर्श प्रज्वलित अग्नि के समान था, राक्षसों पर पड़कर उनके अंगों को विदीर्ण करने लगे।   |   ramayan सर्ग 6.89: विभीषण का राक्षसों पर प्रहार, उनका वानरयूथ पतियों को प्रोत्साहन देना, लक्ष्मण द्वारा इन्द्रजित के सारथि का और वानरों द्वारा उसके घोड़ों का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 89: विभीषण का राक्षसों पर प्रहार, उनका वानरयूथ पतियों को प्रोत्साहन देना, लक्ष्मण द्वारा इन्द्रजित के सारथि का और वानरों द्वारा उसके घोड़ों का वध  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.89.4 
ते शरा: शिखिसंस्पर्शा निपतन्त: समाहिता:।
राक्षसान् द्रावयामासुर्वज्राणीव महागिरीन्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जैसे वज्र नामक अस्त्र विशाल पर्वतों को भेद देता है, उसी प्रकार विभीषण के छोड़े हुए बाण, जिनका स्पर्श प्रज्वलित अग्नि के समान था, राक्षसों पर पड़कर उनके अंगों को विदीर्ण करने लगे।
 
Just as the weapon called Vajra pierces huge mountains, similarly the arrows shot by Vibhishana, whose touch was like burning fire, fell on the demons and began tearing their limbs.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)