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ramayan 6.89.38: महर्षियों ने कहा, ‘विश्व का कल्याण हो।’ उस समय गंधर्व अत्यन्त दुःखी हुए। वे भाटों सहित वहाँ से भाग गए।   |   ramayan सर्ग 6.89: विभीषण का राक्षसों पर प्रहार, उनका वानरयूथ पतियों को प्रोत्साहन देना, लक्ष्मण द्वारा इन्द्रजित के सारथि का और वानरों द्वारा उसके घोड़ों का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 89: विभीषण का राक्षसों पर प्रहार, उनका वानरयूथ पतियों को प्रोत्साहन देना, लक्ष्मण द्वारा इन्द्रजित के सारथि का और वानरों द्वारा उसके घोड़ों का वध  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.89.38 
स्वस्त्यस्तु लोकेभ्य इति जजल्पुस्ते महर्षय:।
सम्पेतुश्चात्र संतप्ता गन्धर्वा: सह चारणै:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
महर्षियों ने कहा, ‘विश्व का कल्याण हो।’ उस समय गंधर्व अत्यन्त दुःखी हुए। वे भाटों सहित वहाँ से भाग गए।
 
The great sages said, 'May the world be blessed.' At that time the Gandharvas were very distressed. They fled from there along with the bards.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)