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तमसा पिहितं सर्वमासीत् प्रतिभयं महत्॥ ३५॥
अस्तं गते सहस्रांशौ संवृते तमसा च वै।
रुधिरौघा महानद्य: प्रावर्तन्त सहस्रश:॥ ३६॥
अनुवाद
इस प्रकार सब कुछ अंधकार में डूब गया और एक बहुत ही भयानक दृश्य प्रकट हुआ। सूर्य अस्त हो गया, चारों ओर अंधकार फैल गया और रक्त से भरी हजारों बड़ी नदियाँ बहने लगीं।
So everything was covered in darkness and a very terrifying sight appeared. The sun set, darkness spread everywhere and thousands of large rivers full of blood started flowing.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥