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ramayan 6.89.34-35h: सभी दिशाएँ और यहाँ तक कि उपदिशाएँ भी असंख्य अस्त्रों और सैकड़ों तीखे बाणों से व्याप्त हो गयीं।   |   ramayan सर्ग 6.89: विभीषण का राक्षसों पर प्रहार, उनका वानरयूथ पतियों को प्रोत्साहन देना, लक्ष्मण द्वारा इन्द्रजित के सारथि का और वानरों द्वारा उसके घोड़ों का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 89: विभीषण का राक्षसों पर प्रहार, उनका वानरयूथ पतियों को प्रोत्साहन देना, लक्ष्मण द्वारा इन्द्रजित के सारथि का और वानरों द्वारा उसके घोड़ों का वध  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  6.89.34-35h 
तै: पतद्भिश्च बहुभिस्तयो: शरशतै: शितै:॥ ३४॥
दिशश्च प्रदिशश्चैव बभूवु: शरसंकुला:।
 
 
अनुवाद
सभी दिशाएँ और यहाँ तक कि उपदिशाएँ भी असंख्य अस्त्रों और सैकड़ों तीखे बाणों से व्याप्त हो गयीं।
 
All directions and even the sub-directions were pervaded by the innumerable weapons and hundreds of sharp arrows falling there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)