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ramayan 6.89.33-34h: उन दोनों के छोड़े हुए तीखे बाणों से आकाश भर गया और वहाँ अन्धकार छा गया।   |   ramayan सर्ग 6.89: विभीषण का राक्षसों पर प्रहार, उनका वानरयूथ पतियों को प्रोत्साहन देना, लक्ष्मण द्वारा इन्द्रजित के सारथि का और वानरों द्वारा उसके घोड़ों का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 89: विभीषण का राक्षसों पर प्रहार, उनका वानरयूथ पतियों को प्रोत्साहन देना, लक्ष्मण द्वारा इन्द्रजित के सारथि का और वानरों द्वारा उसके घोड़ों का वध  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  6.89.33-34h 
ताभ्यामुभाभ्यां तरसा प्रसृष्टैर्विशिखै: शितै:॥ ३३॥
निरन्तरमिवाकाशं बभूव तमसा वृतम्।
 
 
अनुवाद
उन दोनों के छोड़े हुए तीखे बाणों से आकाश भर गया और वहाँ अन्धकार छा गया।
 
The sky was filled with the sharp arrows shot by both of them and darkness prevailed there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)