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ramayan 6.89.31-32h: धनुष से छोड़े गए बाणों से आकाश चारों ओर से ढक गया। अतः उसमें दिखाई देने वाली वस्तुएँ अदृश्य हो गईं।   |   ramayan सर्ग 6.89: विभीषण का राक्षसों पर प्रहार, उनका वानरयूथ पतियों को प्रोत्साहन देना, लक्ष्मण द्वारा इन्द्रजित के सारथि का और वानरों द्वारा उसके घोड़ों का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 89: विभीषण का राक्षसों पर प्रहार, उनका वानरयूथ पतियों को प्रोत्साहन देना, लक्ष्मण द्वारा इन्द्रजित के सारथि का और वानरों द्वारा उसके घोड़ों का वध  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  6.89.31-32h 
चापवेगप्रयुक्तैश्च बाणजालै: समन्तत:॥ ३१॥
अन्तरिक्षेऽभिसम्पन्ने न रूपाणि चकाशिरे।
 
 
अनुवाद
धनुष से छोड़े गए बाणों से आकाश चारों ओर से ढक गया। अतः उसमें दिखाई देने वाली वस्तुएँ अदृश्य हो गईं।
 
The sky was covered from all sides by the arrows shot from the bow. Hence the visible objects in it became invisible. 31 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)