vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 89: विभीषण का राक्षसों पर प्रहार, उनका वानरयूथ पतियों को प्रोत्साहन देना, लक्ष्मण द्वारा इन्द्रजित के सारथि का और वानरों द्वारा उसके घोड़ों का वध
»
श्लोक 3
श्लोक
6.89.3
ततो विस्फारयामास महद् धनुरवस्थित:।
उत्ससर्ज च तीक्ष्णाग्रान् राक्षसेषु महाशरान्॥ ३॥
अनुवाद
वहाँ खड़े होकर उन्होंने अपना विशाल धनुष खींचा और राक्षसों पर बड़े-बड़े तीखे बाणों की वर्षा करने लगे॥3॥
Standing there he drew his huge bow and began to shower large, sharp arrows upon the demons. ॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×