श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 89: विभीषण का राक्षसों पर प्रहार, उनका वानरयूथ पतियों को प्रोत्साहन देना, लक्ष्मण द्वारा इन्द्रजित के सारथि का और वानरों द्वारा उसके घोड़ों का वध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.89.3 
ततो विस्फारयामास महद् धनुरवस्थित:।
उत्ससर्ज च तीक्ष्णाग्रान् राक्षसेषु महाशरान्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ खड़े होकर उन्होंने अपना विशाल धनुष खींचा और राक्षसों पर बड़े-बड़े तीखे बाणों की वर्षा करने लगे॥3॥
 
Standing there he drew his huge bow and began to shower large, sharp arrows upon the demons. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)