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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 89: विभीषण का राक्षसों पर प्रहार, उनका वानरयूथ पतियों को प्रोत्साहन देना, लक्ष्मण द्वारा इन्द्रजित के सारथि का और वानरों द्वारा उसके घोड़ों का वध  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  6.89.25-26h 
हनूमानपि संक्रुद्ध: सालमुत्पाटॺ पर्वतात्।
स लक्ष्मणं स्वयं पृष्ठादवरोप्य महामना:॥ २५॥
रक्षसां कदनं चक्रे दुरासाद: सहस्रश:।
 
 
अनुवाद
उस समय महाहृदयी हनुमान ने लक्ष्मण को अपनी पीठ से उतार लिया और स्वयं अत्यन्त क्रोधित होकर पर्वत शिखर से एक साल वृक्ष उखाड़कर हजारों राक्षसों का संहार करने लगे। शत्रुओं के लिए उन्हें पराजित करना अत्यन्त कठिन हो गया।
 
At that time, the great-hearted Hanuman took Lakshman off his back and himself became very angry and uprooted a sal tree from the mountain peak and started killing thousands of demons. It was very difficult for the enemies to defeat him. 25 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)