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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध
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श्लोक 8
श्लोक
6.88.8
तीक्ष्णसायकनिर्भिन्नान् शूलशक्त्यृष्टितोमरै:।
अद्य वो गमयिष्यामि सर्वानेव यमक्षयम्॥ ८॥
अनुवाद
‘आज मैं अपने त्रिशूल, भाले, बाण और तीखे बाणों से तुम सबको टुकड़े-टुकड़े करके यमलोक भेज दूँगा।॥8॥
‘Today, I will send all of you to Yamaloka by tearing you into pieces with my trident, spear, arrows and sharp arrows.॥ 8॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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